स्टाम्प शुल्क क्या है? Stamp Duty Kya Hai

Stamp Duty Kya Hai – इस पोस्ट में स्टाम्प ड्यूटी क्या हैं. Stamp Duty Rates को कैसे निर्धारित किया जाता हैं. इसके बारे में विस्तार से यहाँ जानकारी दी गई हैं.

जब कोई भी व्यक्ति जमीन, प्लाट या किसी भी प्रकार का प्रोपर्टी खरीदता हैं. या उस प्रोपर्टी को उपहार स्वरूप प्राप्त करता हैं. या किसी दुसरे व्यक्ति के साथ अपने सम्पति का अदलाबदली करता हैं. तो वह उस जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्टार के कार्यालय में जाता हैं. और वह प्रोपर्टी का रजिस्ट्री कराता हैं. उस समय उसको उस Property के खरीद पर सरकार को Stamp Duty का भुगतान करना पड़ता हैं.

Stamp Duty Kya Hai

स्टाम्प ड्यूटी क्या हैं?

स्टाम्प ड्यूटी यह एक शुल्क हैं. जो सरकार द्वारा सम्पति के खरीद या सम्पतियों को किसी दुसरे व्यक्ति के नाम पर स्थान्तरण करने पर लगाया जाता हैं. यह शुल्क राज्य सरकार द्वारा आपके सम्पति को पंजीयन करते समय जो दस्तावेज़ होता हैं. उस पर लगाया जाता हैं. किसी भी व्यक्ति को सम्पति का रजिस्ट्रेशन कराते समय स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करना पड़ता हैं. यह भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 के तहत अनिवार्य हैं. Stamp Duty Rates सभी राज्य के अलग – अलग हो सकते हैं.

Stamp Duty के द्वारा आप किसी भी जमीन की रजिस्ट्री करवा लेते हैं. और भविष्य में यदि किसी प्रकार की कानूनी समस्या आती हैं. तब आप साबुत के तौर पर रजिस्टर्ड फाइल को पेश कर सकते हैं.

स्टाम्प ड्यूटी के माध्यम से ली गई कोई भी जमीन का पंजीकरण दस्तावेज़ आपको उस सम्पति का स्वामित्व को दर्शाता हैं. जो एक कानूनी दस्तावेज़ भी हैं. जिसे आप जरुरत पड़ने पर आदालत में साबुत के तौर पर पेश कर सकते हैं.

स्टाम्प शुल्क किसी जमीन सम्पति के बाजार मूल्य का 5 से 7 प्रतिशत होता हैं. और सम्पति का रजिस्ट्रेशन चार्ज एक प्रतिशत होता हैं. आप जब भी कोई सम्पति को खरीदने जाए तो आप उसके Stamp Duty and Registration Charges का कितना भुगतान करना हैं. इसके बारे में पहले ही पता कर लेनी चाहिए. क्योकि अलग – अलग राज्य में Stamp Duty and Registration Charges अलग – अलग हो सकता हैं. इस समय भारत में राज्यों के अनुसार स्टाम्प शुल्क 4 से 10 प्रतिशत तक हैं. सभी राज्य अपने यहाँ जमीनों का सर्कल रेट तय करते हैं. यानि इसका मतलब सरकार द्वारा किसी जमीन का न्यूनतम रेट तय किया जाना होता हैं. और इसी रेट पर सरकार स्टाम्प ड्यूटी शुल्क और पंजीकरण शुल्क निरधारित करती हैं. Stamp Duty को निर्धारण करने के लिए अनेकों आधार होता हैं. जिसके अनुसार स्टाम्प शुल्क निर्धारित की जाती हैं जैसे –

1 सम्पति का मार्किट रेट क्या हैं.
2 यदि घर हैं तो वह कितने फ्लोर का बना हैं.
3 सम्पति कमर्सिअल हैं या आवासीय .
4 वह सम्पति की क्षेत्र में स्थित हैं.
5 जो व्यक्ति सम्पति को खरीद रहा हैं उसकी उम्र और लिंग क्या हैं.

किसी सम्पति की स्टाम्प शुल्क नीचे दिए गए कारकों पर आधारित होता हैं.

सम्पति की आयु – स्टाम्प शुल्क की गणना सम्पति की न्यूनतम मूल्य पर निर्भर करती हैं. और इसमें सम्पति की आयु भी भूमिका निभाती हैं.

सम्पति के क्रेता की आयु पर – अधिकतर राज्य में वरिष्ट सीनियर सिटीजन नागरिकों को कम स्टाम्प शुल्क देने पड़ते हैं. इन्हें सरकार की तरफ से स्टाम्प शुक्ल के कुछ प्रतिशत की छुट दी जाती हैं.

सम्पति के प्रकार – सम्पति किस प्रकार की हैं. उसके अनुसार स्टाम्प शुल्क देना होता हैं. जैसे – Apartment and Flat के लिए ज्यादा Stamp Duty का भुगतान करना पड़ता हैं. जबकि स्वतंत्र घर का शुल्क कम होता हैं.

व्यक्ति का लिंग – भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिला यदि सम्पति को खरीदती हैं. तो उन्हें कम स्टाम्प शुल्क का भुगतान करना पड़ता हैं.

सम्पति का एरिया – सम्पति किस क्षेत्र एरिया में हैं. गांव में हैं या शहर में गांव के अपेक्षा शहर में स्टाम्प शुल्क ज्यादा लगता हैं.

आराम सुबिधा – आप जो सम्पति को खरीद रहें हैं उसकी सुबिधा किस प्रकार की हैं. इस पर भी स्टाम्प शुल्क निर्धारित होता हैं. उच्च स्तरीय सुविधाओं वाले संपत्ति पर ज्यादा स्टाम्प शुल्क का भुगतान करना पड़ता हैं.

भारत के राज्यों की स्टाम्प ड्यूटी कितनी हैं उसकी की लिस्ट

राज्यों का नाम  Stamp Duty Rates
आंध्र प्रदेश 5%
अरुणाचल प्रदेश 6%
असम 8.25%
बिहार 5.7% – 6.3%
छत्तीसगढ 5%
गोवा 3.5% – 5%
गुजरात 4.9%
हरियाणा 4% – 8%
हिमाचल प्रदेश 5%
जम्मू और कश्मीर 5%
झारखंड 4%
कर्नाटक 5%
केरल 8%
Madhya Pradesh 5%
महाराष्ट्र 6%
मणिपुर 7%
मेघालय 9.9
मिजोरम 9%
नगालैंड 8.25%
ओडिशा 4% – 5%
पंजाब 6%
राजस्थान 4% – 5%
सिक्किम 4% – 9%
तमिलनाडु 7%
तेलंगाना 5%
त्रिपुरा 5%
Uttar Pradesh 7%
उत्तराखंड 3.75% – 5%
पश्चिम बंगाल 6% – 7%

Stamp Duty Kya Hai (FAQ)

प्रश्न 01 – स्टाम्प ड्यूटी कैसे निकालते हैं?

कोई व्यक्ति जब किसी सम्पति को खरीदता हैं. या किसी दुसरे व्यक्ति को उपहार स्वरूप हस्तांतरित करता हैं. तब उस जमीन के न्यूनतम मूल्य जो सरकार द्वारा सर्किल रेट निर्धारित हैं. उस रेट पर स्टाम्प ड्यूटी लगता हैं. यह भारत के सभी राज्यों में अलग – अलग रेट हो सकता हैं.

प्रश्न 02 – स्टाम्प पेपर कहाँ मिलता हैं?

यदि आपको 500 रूपये से कम के स्टाम्प पेपर की जरुरत हैं. तब आप अधिकृत स्टाम्प पेपर विक्रेता से खरीद सकते हैं. और 500 सौ से ज्यादा के लिए आपको बैंको से संपर्क करना पड़ता हैं.

प्रश्न 03 – स्टाम्प शुल्क कौन लगाता हैं?

स्टाम्प शुल्क राज्य सरकार द्वारा किसी भी सम्पति के खरीद बेच पर लगाया जाता हैं.

प्रश्न 04 – क्या स्टाम्प शुल्क वापस हो सकता हैं?

स्टाम्प शुल्क वापस नहीं होता हैं. यह पैसा सरकार के पास चला जाता हैं. जिसको वह राज्य के विकास कार्य के लिए उपयोग करती हैं.

प्रश्न 05 – जीएसटी स्टाम्प ड्यूटी में शामिल होता हैं?

सम्पति की बिक्री पर लगाए जाने वाला कर स्टाम्प ड्यूटी और जीएसटी अलग – अलग चार्ज हैं. इसका एक दुसरे से कोई वासता नहीं होता हैं.

प्रश्न 06 – क्या होमलोन में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज शामिल होता हैं?

Stamp Duty and Registration Charges को होमलोन में शामिल नहीं किया जा सकता हैं. यह सम्पति को खरीदने पर लगने वाला अतिरिक्त खर्च होता हैं.

सारांश

दोस्तों इस पोस्ट में स्टाम्प शुल्क क्या हैं. इसको किस आधार पर निर्धारित किया जाता हैं. इसका भुगतान किस आधार पर किया जाता हैं. इसकी पूरी जानकारी यहाँ विस्तार से दी गई हैं. आप यदि कोई सम्पति प्रोपर्टी खरीदते हैं. तो यह जानकारी आपके लिए हैं.

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